इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में हुआ घोटाला, पीएमओ के निर्देश पर जाँच कर रहे संभागायुक्त


अनूपपुर। व्यापम घोटाला मध्य प्रदेश एवं बिहार इंटर टॉपर घोटाला के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार की केंद्रीय विश्वविद्यालय (इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक (मध्य प्रदेश) में तीन अलग-अलग बड़े घोटाला का पीएमओ के निर्देश पर जाँच कर रहे अधिकारी श्री शोभित जैन, आयुक्त, शहडोल संभाग (म.प्र.) ने जाँच उपरांत अमरकंटक थाना प्रभारी आर.बी. सोनी को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए है। 13.05.2019 को अरुण कुमार साहू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस घटनाक्रम की जानकारी समाज के चौथे स्तम्भ के समक्ष रखी। अरुण कुमार साहू ने बताया कि पहला घोटाला यह है कि राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में केवल दशवी पास (जो 14 बार में भी स्नातक(बीई) की सेकंड सेमेस्टर पास नही हो सकी है) लड़की को पीएचडी एनट्रेंस परीक्षा में बायो टेक्नॉलोजी विषय की ऑल इंडिया टॉपर बना दिया गया है साथ ही पीएचडी की कोर्सवर्क की परीक्षा पास करा दिया तथा शोध उपाधि समिति से भी अनुमोदन दे दिया जबकि लड़की की योग्यता केवल दसवीं तक ही है। अकादमिक सत्र 2017 में स्नातक, स्नाकोत्तर तथा पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने हेतु “ ऑल इंडिया एंट्रन्स एक्जामिनेशन ” का विज्ञापन प्रकाशित किया गया, जिसमें फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 09.04.2017 थी, स्नातकोत्तर तथा पीएचडी की परीक्षा 29-04-2017 को तथा स्नातक की 30-04-2017 को तिथि निर्धारित की गयी। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने अपने परिचित सुश्री विजेतना सिंह को गैरकानूनी एवं भ्रष्टाचार करके पीएचडी बायोटेक्नोलाजी में प्रवेश दिलाने के लिए “ऑल इंडिया एंट्रन्स एक्जामिनेशन” का फॉर्म भरवाया, यह जानते हुए कि वह लड़की केवल दशवी पास है तथा उस दिनांक तक स्नातक पास नही हो सकी है तथा उस लड़की ने अपने जिंदगी में कभी भी बायोटेक्नोलाजी विषय की पढ़ाई नहीं की है, फिर भी उसका फॉर्म ऑल इंडिया एंट्रन्स एक्जामिनेशन के लिए ये लोग भरवाए क्योंकि ऑल इंडिया एंट्रन्स एक्जामिनेशन के प्रश्नपत्र को प्रो टी वी कटटीमनी, प्रो बसव राज डोनुर तथा प्रो भूमि नाथ त्रिपाठी अपने हिसाब से बनवाते थे, लड़की का नाम ऑल इंडिया एंट्रन्स एक्जामिनेशन में इन्होंने छुपाकर लिखवाया तथा उसने विजेतना सिंह के बजाए वी सिंह अपना नाम लिखा। प्रो टी वी कटटीमनी, प्रो बसव राज डोनुर तथा प्रो भूमि नाथ त्रिपाठी आपस में साँठ-गाँठ करके ऑल इंडिया एंट्रन्स एक्जामिनेशन का एक सेंटर गोवा-पणजी में रखवाया जबकि वहाँ ऑल इंडिया एंट्रन्स एक्जामिनेशन देने वाले छात्रों की संख्या नगण्य थी, वहाँ प्रो भूमि नाथ त्रिपाठी परीक्षा लेने गए तथा सुश्री विजेतना सिंह ने “पीएचडी बायोटेक्नोलाजी” में प्रवेश दिलाने के लिए हुए “ऑल इंडिया एंट्रन्स एक्जामिनेशन” में दसवीं पास लड़की ऑल इंडिया टॉप किया तथा मेरिट लिस्ट में पहला नाम था तथा जुलाई 2017 में “पीएचडी बायोटेक्नोलाजी” में सुश्री विजेतना सिंह ने प्रवेश ले लिया। लड़की का बेचलर ओफ इंजीनियरिंग (बीई) इलेक्ट्रिकल का रोल नम्बर 3112410304 है जो छत्तीसगढ़ के क्रिस्चन कॉलेज आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलजी की छात्र है, जो दशवी के बाद बिना बारहवी के डिप्लोमा के माध्यम से बीई में प्रवेश लिया है, वर्ष 2017 में पीएचडी की ऑल इंडिया टॉपर का स्नातक में वर्ष 2014, 2015, 2017, 2018 में फैल होने का मार्कशीट इस प्रेस विज्ञप्ति के साथ संलग्न है। अर्थात सुश्री विजेतना सिंह का मूल योग्यता अभी भी केवल दशवी पास है। स्पष्ट है की विवि द्वारा ऑल इंडिया एंट्रन्स एक्जामिनेशन का प्रश्न पत्र परीक्षा से पूर्व या तो बेचा गया था या अपने परिचित को परीक्षा से पूर्व प्रश्न पत्र दे दिया गया था या छात्रा ने ओएमआर शीट (उत्तर पुस्तिका) खाली छोड़कर आयी होगी जिसे परीक्षा के पश्चात ओएमआर शीट में सही उत्तर भर दिए गए होंगे।
अरुण कुमार साहू ने आगे बताया कि पिछले 21महीने से छात्रा को बिना वेरिफिकेसन किए प्रतिमाह रुपए 08 हजार की स्कालरशिप भारत सरकार के फंड से दी जा रही है। पीएचडी में प्रवेश लेने के पश्चात छः माह पीएचडी कोर्सवर्क की पढ़ाई करनी पड़ती है, बायोटेक्नॉलोजी विषय के शिक्षक पता नहीं कैसे तथा कौनसी पढ़ाई करवाए की दसवीं पास लड़की पीएचडी कोर्सवर्क की परीक्षा में पास हो गयी। इतना ही नहीं गैर कानूनी रूप से लाभ पहुचाने की नियत से अपने प्रभाव एवं पद का उपयोग करके सुश्री विजेतना सिंह के नाम पर कई रीसर्च पेपर एवं बुक चेप्टर को प्रकाशित करवा दिए है यहाँ तक की टेलर एंड फ्रैन्सिस ग्रूप के अंतरराष्ट्रीय जर्नल एवं बुक चौप्टर में भी प्रकाशन करवा दिए है। तथा प्रो भूमि नाथ त्रिपाठी एवं सुश्री विजेतना सिंह को जून 26जी से 29जी, 2018 को चाइना हॉंगजूयं जेजिंग प्रोविंष चाइना में भेजा। बायोटेक्नॉलोजी विभाग ने सुश्री विजेतना सिंह के पीएचडी में प्रवेश लेने के पश्चात पाँच बार डीपॉर्ट्मेंटल रीसर्च कमेटी (डीआरसी) की बैठक क्रमशः दिनांक 22-09-2017, 23-11-2017, 07-12-2017, 04-04-2018 तथा 25-05-2018 को सम्पन्न की गयी। डीपॉर्ट्मेंटल रीसर्च कमेटी (डीआरसी) की बैठक में तथा शोध उपाधि समिति की बैठक की अध्यक्षता प्रो टी वी कटटीमनी किए है तथा शोध उपाधि समिति ने सुश्री विजेतना सिंह के शोध का अनुमोदन करते रहा।

यह प्रथम घोटाला
अरुण कुमार ने आगे बताया कि अपने परिचितों को गैरकानूनी ढंग से लाभ पहुचाने के लिए कुलसचिव पी सिलवेनाथन, प्रो टी वी कटटीमनी, प्रो भूमि नाथ त्रिपाठी ने भारत सरकार को भी नहीं बक्शा है, एक बार नहीं दो बार बायोटेक्नॉलोजी विभाग के शोध छात्रा को विदेश घुमाने एवं उसे अविधिक तरीके से लाभ पहुचाने के लिए ये लोग एक फॉर्म सुश्री विजेतना सिंह को दक्षिण कोरिया भेजने के लिए भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रोधोगिकी मंत्रालय के अधीन एजेन्सी एसईआरबी, की ओर भेजा, एसईआबी ने विश्वविद्यालय से अग्रेषित इस प्रपोजल को स्वीकार कर लिया जिसका विवरण इस प्रकार है और एसईआरबी एण्ड इंटरनेषनल ट्रेवल के समर्थन और 16 से 30 अप्रैल 2019 तक आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के लिए अनुशंसित उम्मीदवारों की सूचीय एस और नंबर और 10, फाइल नं. आईटीएस 2019/000611, आवेदक का नाम विजेतना सिंह, संस्थान का नाम पते के साथरू इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय जिला-अनूपपुर, मध्यप्रदेश ध् 488686 स्थान और दिनांक के साथ घटना का शीर्षक – 23 वाँ अंतर्राष्ट्रीय समुद्री शैवाल संगोष्ठी ) आईएसएस 2019), दक्षिण कोरिया 928 अप्रैल, 2019 से 03 मई, 2019), तथा मई 2019 में प्रो भूमि नाथ त्रिपाठी तथा सुश्री विजेतना सिंह दक्षिण कोरिया में मजे करके भारत सरकार से फायदा लेकर फर्जी पेपर पढ़ने तथा बनावटी शोध करने के नाम पर देश से छल किया है।

यह दूसरा घोटाला का
अरुण कुमार ने आगे बताया कि दूसरा घोटाला बहाली घोटाला है, विवि में बहाली में गड़बड़ी सामने आयी है और ऐसे उम्मीदवार लिखित परीक्षा में टॉपर हो गए है जो बुनियादी सवालों के जवाब देने में असमर्थ है, राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2015 में प्रकाशित भर्ती विज्ञापन में लिखित परीक्षा में उन्ही उम्मीदवारों का रिजल्ट निकाला जिन लोंगो से भर्ती पूर्व सेटिंग हो गयी थी, जो वर्ष 2015 में प्रकाशित भर्ती विज्ञापन में जिन्हें अयोग्यध् अपात्र घोषित किया गया था उन पदों के लिखित परीक्षा का रिजल्ट नहीं आया तथा ये सभी अयोग्य उम्मीदवार को वर्ष 2017 में विज्ञापन निकालकर भर्ती कर दिया गया ऐसे लोग लिखित परीक्षा में टॉपर हो गए है जो दो लाइन हिंदी तथा अंग्रेजी नही लिख सकते है। आज भी अनेक उम्मीदवार वर्ष 2015 में प्रकाशित भर्ती विज्ञापन में लिखित परीक्षा के रिजल्ट के इंतजार में है ऐसे हजारों छात्रों का फीस का भी गबन कर दिया गया है जिसका साक्ष्य दे दिया गया है। विवि में बहाली करवाने के लिए परीक्षा पूर्व प्रश्नपत्र बेच दिए जाते है या अपने परिचितों को दे दिए जाते है तथा उत्तरपुस्तिका खाली छोड़कर आने पर भी उसे बाद में भर दिया जाता है इस कार्य को अंजाम देने के लिए कुलपति प्रो टी वी कटटीमनी ने एक गिरोह बनाया है जो प्रो टी वी कटटीमनी के इशारे पर फर्जी स्किल टेस्ट लेते है जिसका रिजल्ट कोई अन्य अधिकारी बनाया है। वर्ष 2015 से लेकर मार्च 2018 तक नान-टीचिंग के विभिन्न पदों पर हुए भर्ती की प्रक्रिया, भर्ती के लिए आयोजित लिखित परीक्षा, भर्ती के लिए आयोजित स्किल टेस्ट में किस प्रकार भ्रष्टाचार, लापरवाही, शासकीय पद का दुरुपयोग, ईमानदारी में कमी, धोखा, कूटरचना, आर्थिक अपराध एवं सामूहिक रूप से अपराध हुए है इसका साक्ष्य कमिश्नर शोभित जैन को दे दिया गया है।

तीसरा घोटला बिल्डिंग घोटाला
अरुण कुमार ने आगे बताया कि तीसरा घोटाला बिल्डिंग घोटाला है, विवि को मिनिस्ट्री ओफ सोसल जस्टिस एंड इम्पावरमेंट ने छव. 11015/8/2014-बीसी और आई डेटेड थर्ड दिसम्बर, 2014 दिनांक तीन दिसंबर 2014 को जारी पत्र में ओबीसी छात्रों के लिए 100 सीट तथा 100 सीट की दो हॉस्टल बनाने हेतु आईजीएनटीयू को केंद्रीय सहयोग राशि रुपए पाँच करोड़ चालीस लाख भेजा जिसमें तीन करोड़ की अतिरिक्त राशि लगाकर कुछ दूसरा निर्माण किया गया तथा विवि ने भारत सरकार को झूठी एवं बनावटी जानकारी भेजकर बताया कि ओबीसी छात्रों के लिए 100 सीट तथा 100 सीट की दो हॉस्टल बन गयी है तथा 200 ओबीसी छात्रों नाम की फर्जी लिस्ट भारत सरकार को भेजी गयी है जबकि ओबीसी छात्रों के लिए ना तो हॉस्टल बना है ना ही उसमें ओबीसी छात्रों ने शिफ्ट किया है। विवि के इस धोखाधड़ी के साक्ष्य को कमिश्नर श्री शोभित जैन ने वेरिफाई कराकर अमरकंटक थानाप्रभारी श्री आरबी सोनी को एफ आई आर दर्ज करने का निर्देश दे दिया है। इतना ही नहीं विवि में बड़े पैमाने पर अलग-अलग बिल्डिंग घोटाला हुए है तथा ऐसी भी बिल्डिंग बनी है जो कभी भी गिर सकती है तथा हजारों आदिवासी एवं अन्य वर्ग के छात्रों की जान जा सकती है।

कुलपति के चयन में हुआ धॉंधली
अरुण कुमार ने आगे बताया कि – चूँकि मैंने इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति चयन में धाँधली एवं चल रहे भ्रष्टाचार एवं अपराध के जाँच एवं कार्यवाही विषयक शिकायत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सहित कई प्रतिष्ठित एवं वैधानिक संस्थानों में की है जिसमें मैंने प्रो टी वी कटटीमनी, प्रो एडीएन बाचपेयी, प्रो प्रकाशमनी त्रिपाठी, प्रो बलवंत जानी तथा प्रो कृष्णा भट्ट की शिकायतों की जाँच कमिश्नर शहडोल शोभित जैन की ओर अग्रेषित हुआ है तत्संबंध कमिश्नर श्री शोभित जैन ने मुझे अपने आयुक्त कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया था, तथा मै कमिश्नर शहडोल शोभित जैन के कार्यालय में दिनांक 24/04/2019 को उपस्थित हुआ तथा शिकायत आवेदन पर आपसे चर्चा हुई ।

संभागायुक्त कर रहे है जांच
कमिश्नर शहडोल श्री शोभित जैन के निर्देश का पालन करते हुए मै अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग पत्र पत्र प्रमाणित सबूतों के साथ दिया है। जिसमें राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक में भर्ती परीक्षा (प्रवेश लेने के लिए भर्ती (एंट्रेन्स) परीक्षा तथा नौकरी लेने के लिए भर्ती की लिखित परीक्षा) में भर्ती कराने के लिए प्रश्न पत्र बेचने, फर्जी तरीके एवं गैर कानूनी रूप से अपने लोंगो को भर्ती करवाने के लिए ईमानदारी में कमी करने, शासकीय पद का दुरुपयोग करने, भ्रष्टाचार करने, धोखाधड़ी करने, कूटरचना करने के जुर्म में कुलपति प्रो टी वी कटटीमनी, प्रो बसव राज डोनुर, प्रो भुमी नाथ त्रिपाठी, प्रो रवीन्द्रनाथ मनुकोंडा, प्रो एन.एस. हरि नारायण मूर्ति, मोहित गर्ग, प्रो प्रसन्ना के सामल, प्रो एस के बाराल, रजिस्ट्रार पी सिलवेनाथन, डॉ.प्रमोद कुमार तथा इस अपराध में शामिल शिक्षकों पर अपराध दर्ज कर जाँच करने का निवेदन किया था चूँकि घटित अपराध संज्ञेय है एवं बेहद-बेहद गम्भीर प्रकृति का है जिसके साक्ष्य ही अपराध की प्रामणिकता है। एफआईआर के पश्चात तुरंत जप्ती एवं गिरफ्तारी किया जाना जरूरी है जिससे पूछताछ में अहम सुराग मिलने की संभावना है अन्यथा ये लोग साक्ष्य को प्रभावित कर फरार भी हो सकते हैं।

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