नई दिल्ली । बैटरी उत्पादन में विस्तार के लिए सरकार ने तैयारी कर ली है और इसके लिए वह देश में 50 जीडब्ल्यू  बैटरी मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाने के लिए जल्द ही कंपनियों के लिए टेंडर जारी करेगी। इसमें 50 अरब डॉलर का इनवेस्टमेंट होगा। बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के लिए आकर्षक फाइनेंशियल इंसेंटिव देने के प्रपोजल पर कैपिटल एक सप्ताह में विचार कर सकती है। पहले बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के लिए 40 जीडब्ल्यू की कैपेसिटी तैयार करने की योजना थी जिसे बढ़ाकर 50 जीडब्ल्यू किया गया है। सरकार इसके लिए सब्सिडी और ड्यूटी में छूट दे सकती है। इसमें मिनिमम ऑल्टरनेट टैक्स को घटाकर आधा करना और इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट ड्यूटी में छूट शामिल हैं। योजना के अनुसार, नीति आयोग बैटरी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स की लोकेशन की पहचान और इनके लिए ड्यूटी में छूट के लिए राज्यों से प्रपोजल मंगाएगा। राज्यों से स्टेट जीएसटी घटाने, जमीन के अधिग्रहण में मदद करने, छूट वाली दरों पर बिजली देने को कहा जाएगा।
अच्छे प्रपोजल्स की पहचान करने के बाद नीति आयोग पहचानी गई लोकेशंस पर प्लांट्स लगाने के लिए कंपनियों से ग्लोबल बिड मंगाएगा। यह शायद पहली बार होगा, जब नीति आयोग इतने बड़े स्तर पर टेंडर की प्रक्रिया को चला रहा है। इससे पहले यह योजना बनाने तक ही शामिल रहता था। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, 'ड्राफ्ट कैबिनेट नोट तैयार कर भेज दिया गया है। समयसीमा कड़ी होने की संभावना है। नीति आयोग को कैबिनेट से अनुमति मिलने के छह महीनों के अंदर बिडिंग को पूरा करना होगा। प्रपोजल के अनुसार, कंपनियों को 2022 तक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने होंगे। इसके बाद उन्हें 2030 तक आठ वर्षों के लिए इंसेंटिव मिलेंगे। न्यूनतम पांच और अधिकतम 20 लोकेशंस की पहचान होने की संभावना है।' बड़े स्तर पर बैटरी मैन्युफैक्चरिंग का प्रपोजल देश में स्टोरेज सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए है। भारतीय कंपनियां बैटरी और बैटरी सेल अमेरिका और चीन जैसे देशों से इम्पोर्ट करती हैं। 2022 तक 175 जीडब्ल्यू रिन्यूएबल कैपेसिटी जेनरेशन कैपेसिटी जोड़ने की योजना, 2030 तक 30 फीसदी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स करने के लक्ष्य के कारण बैटरी स्टोरेज की डिमांड लगभग 300 जीडब्ल्यू होने का अनुमान है।